krishi bill

अगर आप किसान हैं तो आप किसान बिल का विरोध नहीं करेंगे | ये हैं कारण |

पिछले कुछ दिनों से चारो तरफ किसान आंदोलन का माहौल बना हुआ हैं | खासकर पंजाब और हरयाणा जो की देश की सबसे बड़ी मंडी में से आते हैं वह आंदोलन काफी तेजी से हो रहा हैं | लेकिन कृषि बिल का विरोध क्यु हो रहा हैं और ये विरोध सही हैं या गलत इसके बारे में मैंने जानने की कोशिश की |

ये बिल किसानो के लिए सही हैं या गलत इसके लिए इस बिल के पास होने से पहले की मार्किट और पास होने के बाद के मार्किट के द्रिस्य के बारे में जानना होगा |

कृषि बिल से पहले की मंडी |

इस बिल के पास होने से पहले किसान अपनी फसल उगाते थे और राज्य के मंडी में अपने फसलों को बेचते थे | लेकिन ये काम इतना आसान नहीं था | मंडी में अपनी फसल को बेचने के लिए उनको मंडी में बैठे बिचौलिओं से संपर्क करना पड़ता था या यु कहे की कमिशन एजेंट्स से था | कमिशन एजेंट बिच में अपना कमिशन रख कर फसल को खेतो से मंडी तक लाते थे | उसके बाद राज्य सरकार मंडी टैक्स के नाम पर किसानो के फसल से भरी मुनाफा कमाती थी |

इसके कारण किसानो को उनके फसल का पूरा दाम नहीं मिल पाता था | और किसानो से ज्यादा आमदनी एजेंट्स और राज्य सरकार कमाती थी | हलाकि २००३ के बाद से ही सरकार द्वारा कई एक्ट बनाए गए जिससे किसानो की इस दशा में सुधार किया जाए | लेकिन राज्य सरकार द्वारा उन एक्ट को सही तरीके से इस्तेमाल नहीं किये गए और परिणाम स्वरुप किसानो की दशा ज्यो की त्यों रही |

कृषि बिल पास होने का असर |

आइए अब बात करते हैं इस बिल के पास होने के बाद किसानो पे इसका कैसा असर पड़ेगा |

पहला बिल हैं कृषि उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण) विधेयक 2020| अधिकांश लोगो के मन में आशंका हैं कि न्यूनतम मूल्य समर्थन (एमएसपी) प्रणाली समाप्त हो जाएगी। किसान यदि मंडियों के बाहर उपज बेचेंगे तो मंडियां खत्म हो जाएंगी। ई-नाम जैसे सरकारी ई ट्रेडिंग पोर्टल का क्या होगा? तो आपको बता दे की चीजे पहले के जैसे ही चलती रहेगी | इन सब में से किसी भी चीज पर इस बिल का कोई असर नहीं पड़ेगा | न्यूनतम मूल्य समर्थन (एमएसपी) प्रणाली जारी रहेगी और मंडी भी पहले के जैसे चलते रहेंगे |

इससे किसानो को जो अतिरिक्त फायदा होगा वो ये कि वो मंडी से बहार भी बिना किसी रोक टोक और सरकारी दखल के अपने उत्पाद बेच सकेंगे | किसानो को सरकार द्वारा तय किए गए भाव के बजाय अपने मूल्यों पर उत्पाद बेच सकेंगे | अब वो अपने उत्पाद बेचने के लिए अपने राज्य तक सिमित नहीं रहेंगे बल्कि इंटरनेट एवं अन्य सुविधा का इस्मेताल करके दूसरे राज्यों में भी अपने उत्पाद बेच सकेंगे |

दूसरा बिल हैं कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020| अधिकतर लोगो को ऐसा लग रहा हैं कि कॉन्ट्रेक्ट करने में किसानों का पक्ष कमजोर होगा,वे कीमत निर्धारित नहीं कर पाएंगे। जिसके कारण बड़ी बड़ी कंपनियों को लाभ होगा | तो इसके जवाब में मैं इतना ही कहना चाहूंगा की कब तक आप अपनी चीजों के लिए दुसरो पर निर्भर रहेंगे ? आपकी किसी निर्भरता की वजह से एजेंट्स आपका फायदा उठाते रहते हैं और आप अपनी छोटी छोटी जरूरतों के लिए भी तरसते रहते हैं |

इस बिल से किसानो को लाभ हो इसके लिए देश में 10 हजार फार्मर्स प्रोड्यूसर ग्रुप्स (एफपीओ) बन रहे हैं। ये एफपीओ छोटे किसानों को जोड़कर फसल को बाजार में उचित लाभ दिलाने की दिशा में काम करेंगे। कॉन्ट्रेक्ट के बाद किसान को व्यापारियों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। खरीदार उपभोक्ता उसके खेत से ही उपज लेकर जा सकेगा। विवाद की स्थिति में कोर्ट-कचहरी जाने की जरूरत नहीं होगी। स्थानीय स्तर पर ही विवाद निपटाया जाएगा।

साथ ही किसानो को मोल भाव करने का अवसर प्रदान होगा और वो अपने उत्पाद अपने तय किये हुए दामों पे बेच सकेंगे | तो अगर आप किसान हैं तो इस डर को अपने मन से निकल दे इससे इससे आपको कोई नुकसान पहुंचने वाला हैं |

तीसरा बिल हैं आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक -2020| अगर आप सोच रहे हैं कि बड़ी कंपनियां आवश्यक वस्तुओं का स्टोरेज करेगी। उनका दखल बढ़ेगा। इससे कालाबाजारी बढ़ सकती है। तो आप गलत सोच रहे हैं | निजी निवेशकों को उनके कारोबार के ऑपरेशन में बहुत ज्यादा नियमों की वजह से दखल महसूस नहीं होगा। इससे कृषि क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ेगा।

कोल्ड स्टोरेज एवं फूड प्रोसेसिंग के क्षेत्र में निजी निवेश बढ़ने से किसानों को बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर मिलेगा। किसान की फसल खराब होने की आंशका दूर होगी। वह आलू-प्याज जैसी फसलें निश्चिंत होकर उगा सकेगा। एक सीमा से ज्यादा कीमतें बढ़ने पर सरकार के पास उस पर काबू करने की शक्तियां तो रहेंगी ही। इंस्पेक्टर राज खत्म होगा और भ्रष्टाचार भी।

एक जो गौर देने वाली बात हैं वो ये पास होने के बाद सरकार का मंडी पर से नियंत्रण हट जायेगा | अभी सरकार को मजबूरन किसानो की समस्या को सुलझाने के लिए दखल देना पड़ता हैं लेकिन जब सरकार को इस बात की जानकारी ही नहीं रहेगी की मंडी का क्या भाव चल रहा हैं तो वो ऐसे हालत में किसी भी समस्या पे दखल देने से बचने की कोशिश कर सकती हैं |

अब बात ये निकल कर सामने आती हैं कि जब इन तीनो बिल से किसानो को फायदा ही पहुंचने वाला हैं तो फिर ये आंदोलन किस बात का ? और ये आंदोलन करने वाले किसान हैं या कोई और ?

आपको बता ये ये आंदोलन सिर्फ उन राज्यों में ज्यादा हैं जहा बीजेपी की सरकार नहीं हैं | इन आंदोलन को वो लोग ज्यादा बल दे रहे हैं जो मिडिल मन या यु कहे की कमिशन एजेंट्स का काम करके मण्डिओ से मुनाफा कमाते थे | अलग अलग राजनितिक पार्टिया आपने राजनितिक फायदे के लिए इस आंदोलन को बल दे रहे हैं |

लेकिन सवाल ये भी हैं कि अगर ये बिल किसानो के लिए इतने फायदेमंद हैं तो सरकार ने पहले जनरल सिलेक्शन कमेटी क्यों नहीं बनाया ? इसके जबाब में जल शक्ति मंत्री गजेंद्र शेखावत कहते हैं इससे पहले हम डैम सेफ्टी बिल और इंटर रिवर वाटर डिस्प्यूट बिल लेकर आये थे | इस बिल को ३ बार संसद में पेश किया गया , एक बार डिपार्टमेंट कमेटी के सामने , १ बार सिलेक्शन कमिटी के सामने और तीसरी बार लोकशभा में पेश किया गया | लोकशभा में बिल पास होने के बाद राज्यसभा में पेश किया जाना था लेकिन उससे पहले ही पंजाब ने इस बिल को मानने से इंकार कर दिया| और अब तक ये बिल अटका हुआ हैं |

तो इन बातो से साफ़ हैं की जो लोग आंदोलन को बढ़ावा दे रहे हैं या आंदोलन में भाग ले रहे हैं उन्हें किसानो से ज्यादा अपने लाभ की पड़ी हैं | और इसीलिए वो लोग इस बिल के खिलाफ हैं|

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