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पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का निधन, शाम में ही किया था ट्वीट| जीवन में यही क्षण देखने की प्रतीक्षा कर रही थी|

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देर रात जब पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन की खबरें न्यूज चैनल्स पर चलने लगीं तो लोगों को इस पर यकीन नहीं हुआ। बस लोग यही मना रहे थे कि यह खबर झूठी निकले, लेकिन नियति को कौन टाल सकता है। देशवासियों और दुनियाभर में भारतीय डायस्पोरा के बीच लोकप्रिय रहीं सुषमा ने इस दुनिया को एक बेहद शानदार राजनीतिक पारी खेलकर अलविदा कह दिया।

सुषमा के निधन की खबर के बाद बार-बार लोग उनके आखिरी ट्वीट को पढ़ रहे हैं जो बेहद मार्मिक है। एम्स ले जाने से महज तीन घंटे पहले ही उन्होंने एक ट्वीट किया था। यह ट्वीट था जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक के लोकसभा में पारित होने को लेकर।

उन्होंने इस विधेयक के पारित होने पर प्रधानमंत्री का आभार जताया था और जो पंक्ति लिखी थी ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें आभास हो गया हो कि वह इस दुनिया को छोड़कर जा रही हैं। सुषमा ने ट्वीट किया था, ‘प्रधानमंत्री जी-आपका हार्दिक अभिनंदन। मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी।’

 

दिल्ली की पूर्व सीएम से लेकर केंद्रीय मंत्रिमंडल में महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाल चुकीं सुषमा का सोमवार देर रात एम्स में निधन हो गया। वह 67 वर्ष की थीं। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इस बार लोकसभा चुनाव नहीं लड़ा था, लेकिन विदिशा जो कि उनका लोकसभा क्षेत्र रहा है, वहां से बीजेपी उम्मीदवार का प्रचार करने पहुंची थीं। अस्वस्थ्य होने के कारण भी वह सरकार के फैसले पर नजर रखती थीं और हौसला अफजाई करती रहती थीं।

पीएम मोदी के पहले कार्यकाल में विदेश मंत्री रहीं सुषमा ने देश से बाहर रह रहे इंडियन डायस्पोरा के मन में विशेष स्थान बनाया था क्योंकि वह बिना देरी किए उनकी समस्याओं को सुलझा देती थीं। हाल ही में पाक जेल में बंद पूर्व भारतीय नौसैनिक कुलभूषण जाधव के परिवार ने उनसे मुलाकात की थी। बता दें कि सुषमा के विदेश मंत्री रहते हुए भारत ने जाधव मामले को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में उठाया था।

 

सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री थीं सुषमा स्वराज, दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री

भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। वह मौजूदा समय में राजनीति की सबसे लोकप्रिय शख्सियतों में से एक थीं। विनम्रता से लिपटे शब्दों और अकाट्य तर्कों के साथ अपने भाषणों से विरोधियों को भी मुरीद बना लेने वालीं सुषमा स्वराज का राजनीतिक करियर बेहद शानदार रहा। विदेश मंत्री के रूप में उन्होंने विदेशों में बसे एक-एक भारतीय का जिस तरह ध्यान रखा, वह कभी भुलाया नहीं जा सकता है। किसी को मदद की दरगार हुई तो बस एक ट्वीट ही काफी था।

14 फरवरी 1952 को हरियाणा के अंबाला शहर में जन्मीं सुषमा स्वराज मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में विदेश मंत्री थी। वह 7 बार सांसद और 3 बार एमएलए रह चुकी हैं। 1977 में जब वह 25 साल की थीं तब वह भारत की सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री बनी थीं। 1998 में वह दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी थीं।

पेशे से वकील सुषमा स्वराज ने अंबाला के एसडी कॉलेज और पंजाव विश्वविद्यालय के कानून विभाग से पढ़ाई की थी। अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत इन्होंने 1970 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से की थी। वह 1977 में अंबाला छावनी विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुनी गईं। चौधरी देवी लाल की सरकार में वह श्रम मंत्री बनीं और 25 साल की उम्र में कैबिनेट मंत्री बनने का रेकॉर्ड बनाया था।

सन 1990 में सुषमा स्वराज राज्यसभा की सदस्य चुनी गईं और 1996 में लोकसभा चुनावों में वो दक्षिण दिल्ली से 11वीं लोकसभा के लिए सांसद बनीं। सुषमा स्वराज को 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्रालय दिया गया और कैबिनेट में शामिल हुईं। सन 1998 में सुषमा स्वराज 12वीं लोकसभा के लिए दोबारा दक्षिणी दिल्ली से चुनी गईं। 2014 में 16वीं लोकसभा में सुषमा स्वराज विदिशा से जीतकर आईं। यूपीए दो सरकार में सुषमा स्वराज विपक्ष की नेता थीं।

सुषमा स्वराज ने 1970 में छात्र नेता के रूप में राजनीति में प्रवेश किया। 1975 में देश में आपातकाल लगाए जाने के बाद उनकी सक्रियता बहुत बढ़ गई। उन्होंने इंदिरा गांधी की सरकार के खिलाफ कई विरोध प्रदर्शन आयोजित किए। इसके बाद राजनीति में उनका कद तेजी से बढ़ा। महज 27 साल की उम्र में उन्होंने जनता पार्टी का हरियाणा में अध्यक्षा का पद संभाला था। सुषमा स्वराज स्कूल के दिनों में एनसीसी से भी जुड़ी रहीं। वह कई भाषाएं जानती थीं। शुद्ध हिंदी में सजे और सधे हुए शब्दों से संसद से यूनाइटेड नेशन तक में उनके भाषणों ने करोड़ों लोगों के मन को छुआ।

एक सफल नेता के साथ ही वह बेहद कुशल गृहणी भी थीं। सुषमा स्वराज ने कॉलेज के दोस्त स्वराज कौशल से लव मैरिज की थी। सुषमा ने 13 जुलाई 1975 को शादी की थी। उनके पति स्वराज कौशल सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने क्रिमिनल लॉयर हैं। वह देश के एडवोकेट जनरल और मिजोरम के गवर्नर भी रह चुके हैं। स्वराज कौशल 1998 से 2004 तक हरियाणा के सांसद भी रह चुके हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुषमा स्वराज के निधन पर शोक जताया है। उन्होंने ट्वीट किया, ‘भारतीय राजनीति का एक गौरवशाली अध्याय खत्म हो गया। एक ऐसी नेता जिन्होंने जन सेवा और गरीबों का जीवन संवारने के लिए अपनी जिंदगी समर्पित कर दी, उनके निधन पर भारत दुखी है। सुषमा स्वराज जी अपनी तरह की इकलौती नेता थीं, वह करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा की स्रोत थीं।

 

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